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22 जुलाई से श्रवण मास, जाने क्या है महत्व, क्यों भोले बाबा को है प्रिय, कौन-कौन से है पर्व

By Viresh Singh

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श्रावण मास। सावन का महीना जुबान पर आते ही अपने आप में एक अलग अनुभूति होती है। तमाम लेखकारों और फिल्मकारों ने सावन महीने को बहुत ही खूबसूरती दी है। तो वहीं धार्मिक ग्रंथो में यह महीना भगवान भोलेनाथ का विशेष मास बताया गया है। सावन महीना इसलिए भी अपने आप को पुलकित करता है क्योंकि मौसम के हिसाब से या काफी खुशनुमा होता है। काली घटाएं और हरियाली के बीच इस महीने पढ़ने वाले पर्व के चलते कजली गीत, झूला गीत, झूला उत्सव, हरियाली महोत्संव आदि मनाया जाता है और लोग अपने व्यस्त जीवन के बीच पूरे महीने उत्सव के रूप में सावन माह को मनाते हैं।

इस वर्ष है विशेष

सावन महीना इस वर्ष इसलिए विशेष माना जा रहा है क्योंकि इसकी शुरुआत सोमवार के दिन से हो रही है। धार्मिक गंथों के अनुसार श्रावण मास की शुरुआत 21 जुलाई को दोपहर 3ः45 पर हो रही है और इसका समापन 22 जुलाई को 1ः11 पर होगा। सूर्य उदय कल में श्रावण मास 22 जुलाई यानि सोमवार को पढ़ रहा है। जिसके चलते सावन का यह विशेष माह 22 जुलाई से शुरू होना बताया गया है और शिव भक्त सुबह से भगवान की शिव की आराधना पूजा कर सकते हैं।

भगवान शिव को इसलिए है प्रिय

श्रवण मास भगवान शिव का विशेष महीना माना जाता है। सावन शिव को इस लिए सबसे ज्यादा प्रिय है, इसकी अलग-अलग कथाएं बताई गई है। ऐसा बताया जाता है कि माता पार्वती ने सावन महीने में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर व्रत, उपवास किया था। उन्होंने अन्न, जल त्याग कर निराहार रहकर कठोर व्रत किया था। मां पार्वती के इस भक्ति भाव से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने देवी पार्वती से विवाह करना स्वीकार किए। यही वजह है कि भगवान शिव को सावन महीना अति प्रिय है। यही वजह है महिलाएं पति के दीधार्य होने एवं कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने के लिए व्रत उपवास करती है।
तो वही एक कथा यह भी है कि भगवान शिव सावन के महीने में धरती पर अवतरित होकर अपनी ससुराल गए थें। जहां उनका स्वागत अर्द्ध देकर, जलाभिषेक करके किया गया था। जिससे माना जाता है कि प्रत्येक वर्ष सावन मास में भगवान शिव अपनी ससुराल आते हैं। इसलिए भक्तगण इस महीने में उनकी भक्ति में लीन रहते हैं।

सावन महीने में होगे ये पर्व

22 जुलाई, सोमवारः- सावन शुरू, सावन का पहला सोमवार व्रत, कांवड़ यात्रा शुरू
23 जुलाई, मंगलवारः- सावन का पहला मंगला गौरी व्रत
24 जुलाई, बुधवारः- श्रावण संकष्टी चतुर्थी या गजानन संकष्टी चतुर्थी
27 जुलाई, शनिवारः- सावन कालाष्टमी, सावन जन्माष्टमी
29 जुलाई, सोमवारः- सावन का दूसरा सोमवार व्रत
30 जुलाई, मंगलवारः- सावन का दूसरा मंगला गौरी व्रत
31 जुलाई, बुधवारः- कामिका एकादशी
1 अगस्त, गुरुवारः- गुरु प्रदोष व्रत या सावन का पहला प्रदोष व्रत
2 अगस्त, शुक्रवारः- सावन शिवरात्रि
4 अगस्त, रविवारः- सावन अमावस्या या हरियाली अमावस्या
5 अगस्त, सोमवारः- सावन का तीसरा सोमवार व्रत
6 अगस्त, मंगलवारः- सावन का तीसरा मंगला गौरी व्रत
7 अगस्त, बुधवारः- हरियाली तीज, स्वर्ण गौरी व्रत
8 अगस्त, गुरुवारः- विनायक चतुर्थी
9 अगस्त, शुक्रवारः- नाग पंचमी
10 अगस्त, शनिवारः- कल्कि जयंती
11 अगस्त, रविवारः- तुलसीदास जयंती
12 अगस्त, सोमवारः- सावन का चौथा सावन सोमवार व्रत,
13 अगस्त, मंगलवारः- सावन का चौथा मंगला गौरी व्रत, सावन दुर्गाष्टमी
16 अगस्त, शुक्रवारः- सावन पुत्रदा एकादशी, वरलक्ष्मी व्रत, सिंह संक्रांति
17 अगस्त, शनिवारः- शनि प्रदोष व्रत, सावन का दूसरा प्रदोष व्रत
19 अगस्त, सोमवारः- सावन पूर्णिमा, रक्षाबंधन, राखी, सावन का पांचवां सोमवार व्रत, सावन का समापन, पंचक शुरू, लवकुश जयंती।

 

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