बद्रीनाथ धाम। देश के तीर्थ स्थलों में से प्रमुख एक बद्रीनाथ धाम अब भक्तों के लिए खुलने जा रहा। जानकारी के तहत 12 मई से बद्रीनाथ मंदिर के द्वारा खुलेंग। जिसके बाद भक्त भगवान की पूजा अर्चना कर सकेंगे। ज्ञात हो कि चारों धाम की यात्रा पर तीर्थ यात्री पहुंचते हैं। जिसमें केदारनाथ, बद्रीनाथ ऐसे प्रमुख चारों धाम के तीर्थ स्थल हैं। हिमपात होने एवं ज्यादा ठंड पड़ने की वजह से बद्रीनाथ धाम के मंदिरों के दरवाजे गर्मी तेज होने पर मई माह में खुल पाते है। वही इस वर्ष 12 मई से बद्री धाम के कपाट खुलेंगे।
श्री हरी माता लक्ष्मी का रहा है तपोस्थली
बद्रीनाथ धाम को लेकर जो मान्यता सामने आती है उसके तहत पहाड़ पर्वतों के बीच स्थित उक्त स्थान को भगवान श्री हरि तप के लिए चयन किए और बाल रूप रखकर शिव एवं पार्वती से प्रार्थना करके तपोस्थली के लिए मांग किए थें। माता पार्वती और भगवान शिव बालक की अपार श्रद्धा को देखते हुए यह स्थान उनके लिए निश्चित कर दिए, जहां श्री हरि गहरी तपस्या में लीन थें। बताते हैं कि भयंकर बर्फबारी बारिश के चलते श्री हरि बर्फ के बीच ढ़क रहे थे जहां माता लक्ष्मी ने बेर के विशाल पेड़ का रूप धारण करके श्री हरि को छाया प्रदान किया। जब श्री हरि का तप पूरा हुआ तो देखा की माता लक्ष्मी काफी कष्ट सहन करके उन्हें सुरक्षा प्रदान की है। जिस पर श्री हरि ने कहा कि इस तपस्या में वह भी बराबर तप की है और इस स्थान पर श्री हरि के साथ माता लक्ष्मी को भी इसी तरह से पूजा जाएगा।
श्री हरि ने कहा कि उनकी रक्षा लक्ष्मी ने बदरी वृक्ष के रूप में किया है। ऐसे में मुझे बदरी के नाथ यानी बद्रीनाथ के नाम से जाना जाएगा। इस तरह से भगवान विष्णु का नाम बद्रीनाथ पड़ा। बद्रीनाथ धाम समुद्र तल से 10000 से ज्यादा फिट की ऊंचाई पर स्थित है, जहां भगवान प्रासंगिक का व्रत प्रसिद्ध मंदिर जोशीमठ से बद्रीनाथ मंदिर की करीब दूरी 45 किलोमीटर है।